TRAIN चलने लगी, AKHILESH ने दिखाया आईना, लाखों लोगों ने गजब कर दिया | BH...

सिस्टम में गरीबों की हैसियत कीड़ों से भी बदतर है। अविश्वास का गहरा अँधेरा है। गरीब को न सरकार पर भरोसा है। और न सरकारों के पास ठोस प्लान। गरीब की हैसियत बस 1 वोट की है जो वक़्त आने पर बहलाकर ले लिया जायेगा। सिस्टम में न संवाद है। और न संवेदनशीलता.. इधर लॉकडाउन का आखिरी दिन था..मोदी जी 19 दिन के लिए लॉकडाउन और बढ़ा चुके थे और उधर..और उधर मुंबई के बांद्रा में फंसे हुए हजारों कामगार सड़कों पर आ गए..स्टेशन की तरफ बढ़ने लगे..मजदूरों को लगा कि लॉकडाउन खत्म होने वाला है..ये मजदूर सड़कों पर क्यों आए..शर्म के साथ कहना पड़ रहा है कि कुछ मेन स्ट्रीम मीडिया के न्यूज चैनलों ने इसमें भी हिंदू मुसलमान करने की कोशिश की..देखिए मजदूरों को शौक नहीं है सड़कों पर घूमने का..ये सरासर सरकारों का फेलियर है..ना तो आप भूखों को खाना खिला पा रहे हैं ना तो आप घर घर राशन पहुंचा पा रहे हैं..क्या करे आदमी आप बताइये..उसके सामने दो रास्ते आप लोगों ने छोड़े हैं या तो कोरोना से मर जाए या बिना काम के बेगाने शहर में भूखा मर जाए..गाल बजाने के लिए सरकारों के पास आदेश हैं...कागज दिखा देते हैं कि इतने लोगों तक राशन पहुंच रहा है उतने लोगों तक दूध पहुंचा रहे हैं..लॉकडाउन है लोगों को बाहर नहीं निकलना चाहिए..हमारी भी अपील है कि मोदी जी ने जो कहा है उसका पालन कीजिए घरों में ही रहिए..लेकिन सरकार से भी अपील है कि अगर आप बेरोजगार मजदूरों को खाना नहीं दे सकते तो उनको शहरों की जेल से निकालकर उनके गांवों के पास उनको क्वारेंटाइन कर दीजिए.. इसी पर अखिलेश यादव ने एक ट्वीट किया कि..

मुंबई में हजारों लोगों के सड़कों पर आकर घर लौटने की माँग को देखते हुए उप्र की सरकार तुरंत नोडल अधिकारी नियुक्त करे व केंद्र के साथ मिलकर महाराष्ट्र व अन्य राज्यों में फँसे प्रदेश के लोगों को निकाले. जब अमीरों को जहाज से विदेशों से ला सकते हैं, तो गरीबों को ट्रेनों से क्यों नहीं...
अखिलेश यादव ने गरीबों को ट्रेन से और अमीरों को प्लेन से लाने वाली बात ठीक कही..लेकिन सरकार 25 मार्च को ही नोडल अधिकारी नियुक्त कर चुकी है..ये अधिकारी अपने लोगों का ख्याल रखने में पूरी तरह से फेल हैं..)

अखिलेश यादव ने मोदी के उस दावे को भी कटघरे में खड़ा किया जिसमें मोदी जी ने दूसरी बार लॉकडाउन बढ़ाते हुए कहा था कि जब भारत में एक केस भी नहीं था तब से एयरपोर्ट पर जांच करेके लोगों को आइसोलेट किया जा रहा है अखिलेश ने कहा कि दावा है कि जब कोरोना के केस नहीं थे तब ही विभिन्न एअरपोर्ट्स पर स्क्रीनिंग शुरू कर दी गयी थी लेकिन सवाल ये है कि वो कितनी गंभीर और सार्थक रही. अगर ये सच है तो फिर ये बताया जाए कि कोरोना हमारे देश में पहले पहल कैसे आया...जब सार्थक काम होंगे, तब ही सच में देश का भला होगा...अखिलेश ने बिल्कुल सही कहा कि जब सार्थक काम होंगे तभी देश का भला होगा..सरकार पेपर पर जो नियम बना रही है...वो जमीन पर उतरें तभी कोरोना से लड़ा जा सकता है....उत्तर प्रदेश के जो भी भाई-बहन, मुंबई अथवा महाराष्ट्र के किसी इलाके में फंसे है।और आपको किसी तरह की मदद की ज़रूरत है। तो यूपी सरकार के इन अफसरों से तत्काल संपर्क करें।
नितिन रमेश गोकर्ण, IAS : 9968885979
एसबी शिरोडकर,     IPS : 9454400177------------------------

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