LOCKDOWN में सुपरलेडी बनीं SDM ROSHNI YADAV दिनभर काम रात में समाजसेवा |...

लॉकडाउन की तमाम खबरों के बीच एक ऐसी खबर आई जिसे जिसने भी सुना वो लखनऊ की एसडीएम रोशनी यादव को सलाम किए बिना नहीं रह पाया..सुबह के 3 या 4 बजे का वक्त होगा..लखनऊ की एसडीएम का फोन बजता है...वो फोन उठाती हैं...उधर से आवाज आती है..मैम मेरे पिता एक्सपायर हो गए हैं, प्लीज मुझे घर पहुंचा दीजिये.' लखनऊ से मेरा घर करीब 300 किलोमीटर दूर है..महाराजगंज जाने का कोई जरिया नहीं है..मैम मुझे आखिरी बार अपने पिता को देखना है..सुबह के 5 बजते बजते एसडीएम रोशनी यादव ने बच्ची को लॉकडाउन के बावजूद उसके पिता के अंतिम दर्शन कराने का बंदोबस्त कराया.. बेटी को उसके घर पहुंचाया, जिसके बाद वो अपने पिता की आखिरी दर्शन कर पाई...


एक अधिकारी में इमोशन कितने जरूरी हैं..ये इस कहानी ने बता दिया है..रोशनी यादव भावुकता और वात्सल्य से भरी हैं..उनके लिए फर्ज और इंसानियत सबसे ऊपर हैं...जिस लड़की ने एसडीएम रोशनी यादव को फोन किया वो है कौन इस बारे में पता लगाया गया तो पता चला कि लड़की का नाम अन्नपूर्णा था वो लखनऊ यूनिवर्सिटी में पीजी प्रथम वर्ष की छात्रा थीं. वो यहां पीजी में रहकर पढ़ाई करती थीं. लॉकडाउन के चलते दूसरे लोगों की तरह वो भी अपने परिवार से दूर फंसी हुई थीं. शुक्रवार देर रात करीब 10 बजे उनके परिचित ने पिता की मौत की सूचना दी. घर पर सम्पर्क करने पर भी साफ जवाब नहीं मिल सका. उसने अपने साथियों से सहायता मांगी. एक दोस्त ने लखनऊ की डिप्यूटी कलेक्ट्रेट रोशनी यादव का नंबर दिया. तड़के एसडीएम रोशनी के पास फोन किया..फोन पर अन्नापूर्णा की समस्या सुनने के बाद रोशनी यादव ने ऑनलाइन पास बनवाया और घर पहुंचने के लिए गाड़ी की भी व्यवस्था की, जिससे वो अपने घर पहुंच कर पिता को अंतिम विदाई दे सकीं.

रोशनी यादव यादव जी पर हम अलग से वीडियो बनाएंगे लेकिन इनकी छोटी सी प्रोफाइल जान लीजिए..एसडीएम रोशनी यादव आज़मगढ़ की रहने वाली हैं..इनकी पहली पोस्टिंग सीतापुर थी.. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है..छात्र राजनीति भी की है..इनके पिता अरविंद सिंह यादव व्यवसायी हैं..

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