AKHILESH की खरी-खरी, क्या गरीब की बात करना गुनाह है? LOCKDOWN अमीरों के ...

लॉकडाउन और कोरोना उन लोगों के लिए इवेंट हो सकता है जो जिंदगी की लग्जरी इंज्वाय कर  रहे हैं..जिनके पास पैसा है सुविधाएं हैं वो तो मौज में हैं..वो थाली भी बजा लेंगे..दीया भी जला लेंगे लेकिन वो गरीब जो 500 किमी पैदल चलकर अपने गांव आया है वो उस दीये के तेल से एक वक्त की सब्जी बनाने के बारे में सोचेगा..लॉकडाउन और कोरोना को ऐसे इवेंट में बदल दिया गया है कि जो गरीबों की बात करता है उसे गद्दार बता दिया जाता है जो गरीबों की बात करता है उसे राजनीति पेलने वाला बता दिया जाता है..जो गरीबों की बात करता है उसे हिंदू विरोधी बता दिया जाता है..ऐसे मे अखिलेश यादव ने कहा है कि समाजवादी पार्टी कोरोना संक्रमण रोकने के लिए लागू लॉकडाउन का शत-प्रतिशत पालन कर रही है..एडवाइजरी का पालन करते हुए हमारे कार्यकर्ता पीड़ितों, जरूरतमंदों की सहायता में जुटे हुए हैं..संकट काल में भी सपा लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ सकती है..उन्होंने सवाल किया कि जिनके पेट में दाना नहीं, घर में खाना नहीं, ऐसे गरीबों के बारे में बोलना क्या गुनाह है? सपा सदैव सकारात्मक और रचनात्मक आलोचना की पक्षधर रही है..सरकार से क्या ये नहीं पूछना चाहिए कि किसानों, बेरोजगारों, महिलाओं, नौजवानों और प्रभावित वर्ग के लिए क्या राहत कार्य किए जा रहे हैं ?

लॉकडाउन की लंबी अवधि से घरों में कैद बच्चों और बुजुर्गों की क्या हालत है? जनता को कहां, किन स्थितियों से गुजरना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे सुझाव-शिकायतें टीम इलेवन के काम को अधिक सुसंगत बनाने के लिए होती हैं..जिनको नहीं पता उनको बता दें टीम इलेवन योगी आदित्यनाथ की वो टीम है जो बताती है कि सरकार को कोरोना और लॉकडाउन में क्या करना चाहिए..11 लोग बैठकर सीएम को अपना अपना ज्ञान देते हैं फिर भी..उसके बावजूद कंफ्यूज रहते हैं...

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