सौतेला व्यहवार, AKHILESH का प्रहार | अमीरों के लिए बसें चला दीं | BHARAT...

देश हो या उत्तर प्रदेश यहां  गरीबों से हमेशा छल किया जाता है..हमेशा उनको जूते की नोक पर रखा जाता है...हम ऐसा क्यों कह रहे हैं..क्योंकि लॉकडाउन के बीच ऐसी खबर आई है जिसने यूपी की योगी सरकार की मानसिकता फिर से सामने ला दी है..आपको तो पता ही  होगा कि मजदूर अपने अपने घर आना चाहते हैं लेकिन उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं है..उनको कहा जा रहा है कि जहां हैं वहीं रहें जो बेचारे घर निकलने के लिए कुलबुलाते हैं उनपर या तो लाठियां चलती हैं या फिर क्वारंटीन सेंटर भेज दिया जाता है.. लेकिन आज झांसी से और आगरा से कोटा के लिए सैकड़ों बसें रवाना की गई..क्यों क्योंकि कोटा में महंगी महंगी कोचिंगों में यूपी के अमीर धन्नासेठों के बच्चे पढ़ते हैं..उनके बच्चों को लाने के लिए बसें यूपी से भेजी गई  हैं..बाकी गरीब साला तो मरने के लिए ही पैदा हुआ है..लॉकडाउन में अमीरों के बच्चों को लाने के लिए यूपी रोडवेज की सैकड़ों बसें भेज दी गईं..गरीब गुरबे जहां फंसे हैं उन्हें कौन लाएगा..

ये गरीब कीड़ा बनकर पैदा हुआ था कीड़ा बनकर वोट देते देते मर जाएगा..पहले सरकारों ने विदेशों से अमीरजादों को जहाज से मंगवाया..फिर अब देश के भीतर गरीबों के साथ भेदभाव हो रहा है..संविधान में कहा गया था कि अमीर गरीब सब बराबर होंगे लेकिन ये लाइन बाबा साहब की किताब में ही अच्छी लगती है..गरीबों से इसी सरकारी भेदभाव पर अखिलेश यादव ने भी सवाल खड़े किए..अखिलेश यादव ने कहा
राजस्थान के कोटा में फँसे उप्र के विद्यार्थियों को वापस लाने की योजना का स्वागत है लेकिन ये सवाल भी है कि अन्य राज्यों में भुखमरी के शिकार हो रहे अति निम्न आय वर्ग के गरीबों को वापस लाने की क्या योजना है और ये भी कि प्रदेश के तथाकथित नोडल अधिकारियों के मोबाइल मूक-मौन क्यों हैं ?
जहां के बच्चों को सरकार लेने के लिए सैकड़ों बसें भेज रही है..वहां के पढ़ने वाले बच्चों में ऐसी कौन सी लार लगी हुई है..ऐसे कौन से सुर्खाब के पंख लगे हैं जो गरीबों में नहीं हैं वो हम आपको बता देते हैं...राजस्थान के कोटा में आईआईटी और मेडिकल की कोचिंग कर रहे लगभग 35,000 छात्र हॉस्टल्स में रह रहे हैं..वो कांटों पर नहीं बैठे हैं लेकिन वो बड़े लोगों के मतबल अमीर लोगों के आईएएस आईपीएस धन्नासेठों से बच्चे हैं..

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