अखिलेश से यादव वोट छीनेंगी मायावती..चोरी किया मुलायम का MY समीकरण.. मायावती के लिए हनुमान बने थे अखिलेश


MAYAWATI WANT YADAV VOTE FROM SAMAJWADI PARTY
दोस्त ही दोस्त की कमी सबसे बेहतर तरीके से जानता है..और अखिलेश तो मायावती के सामने हनुमान बन चुके हैं..बहन जी को सीना चीरकर दिखा चुके हैं..इसीलिए मायावती ने यूपी में अखिलेश को धराशाई करने के लिए यादवों का सहारा खोज निकाला है..

मायावती की नजर समाजवादी पार्टी के ही यादव वोटरों पर है..मायावती ने लोकसभा में दानिश अली की जगह जौनपुर के श्याम सिंह यादव को नेता बनाया है..उससे सपा के यादव वोटरों में ये संदेश देने की कोशिश की है कि बीएसपी का जुड़ाव यादव वोटरों के प्रति भी है..बहन जी यादवों की हितैशी हैं..उनके दरवाजे भी यादवों के लिए खुले हैं..

मायावती ने लोकसभा चुनाव के बाद अखिलेश से नाता तोड़ते वक्त  ये कहा भी था कि यादव वोटरों पर अखिलेश का होल्ड नहीं रह गया है..लिहाजा, अब मायावती यादव वोटरों को साधने की जुगत में हैं..

उत्तर प्रदेश में मायावती ने मुनकाद अली को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपकर मुस्लिम कार्ड  भी खेला है.. माना जा रहा है कि बीएसपी अब फिर से अपनी खोई विरासत को मुस्लिम और यादवों के सहारे पाना चाहती है..यानी मुलायम ने जो समीकरण बरसों पहले सपा के लिए बनाया था मायावती अब उसी एम वाई समीकरण का इस्तेमाल बसपा के लिए करना चाहती हैं..यानी मुस्लिम यादव समीकरण से मायावती सपा से जमीन छीनेंगी..

मायावती ने बसपा की विचारधारा से बिल्कुल उलट लोकसभा में बीजेपी के साथ खड़ी नजर आईं थीं..धारा 370 पास कराने में अहम योगदान दिया था..उससे उनके बदले अंदाज का इशारा मिल गया था..राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बीएसपी ये समझ रही है कि फिलहाल किसी भी राजनीतिक पार्टी के पास अपने कोर वोटबैंक इतने मजबूत नहीं रह गए हैं..

ऐसे में जो भी पार्टी आगे बढ़ना चाहती है, उसे सभी जातियों और वर्गों के वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में मायावती की पहली नजर एसपी से छिटक रहे यादव वोटरों पर है.. 2014 के बाद यूपी में हुए हर चुनाव में यादव अपना वोट एसपी के अलावा दूसरे दलों को ट्रांसफर करते रहे हैं.. बीजेपी इसमें फेवरेट रही, इसके बावजूद सपा के पास यादवों का बड़ा शेयर रहा है.. हालांकि 2019 के चुनाव में यादव वोटरों में बीजेपी ने बड़े पैमाने पर सेंधमारी की..

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