मुन्ना बजरंगी को दो केंद्रीय मंत्रियों ने मरवाया ? धनंजय और ब्रजेश सिंह पर भी आरोप, बजरंगी को पता था मौत आने वाली है..






उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल का डॉन मुन्ना बजरंगी मार दिय गया..जेल में हीं बागपत के रहने वाले सुनील राठी ने मुन्ना बजरंगी को सुबह 10 गोलियां मारी..फिर पिस्टल गटर में फेंक दीं..कहते हैं 10 गोलियां चलाने में राठी को समय लगा होगा लेकिन जेल में कोई हरकत नहीं हुई..जैसे सब कुछ पहले तय हो..जैसे सब कुछ प्लानिंग के तहत हुआ हो..पिस्टल में 10 गोलियां आती नहीं हैं..मतलब पहले एक मैगजीन से  गोलियां चलाई गईं..फिर मैगजीन बदली गई..फिर से 5 गोलियां और मारी गईं..पुलिस को गटर से एक पिस्टल और 22 जिंदा कारतूस मिले हैं..मतलब कुल 32 करतूस थे..ये जेल के भीतर कैसे पहुंचे बगपत जेल वाले कुछ बताने के लिए तैयार नहीं हैं...


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सुनील राठी का मुन्ना बजरंगी से कोई लेना देना नहीं था...ना तो सुनील राठी मुन्ना बजरंगी जितना बड़ा गुंडा था..सुनील रीठी मुन्ना बजरंगी के आगे मच्छर था..ना तो सुनील राठी और मुन्ना बजरंगी का एरिया को लेकर कोई लड़ाई थी..सुनील राठी पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का गुंडा है और मुन्ना बजरंगी पूर्वांचल का माफिया था..सुनील राठी  ने मुन्ना बजरंगी को क्यों मारा ये किसी को समझ नहीं आया...




मुन्ना बजरंगी को झांसी जेल से बगपत लाया गया..और सुनील राठी को रुड़की जेल से बगपत लाया गया यानी हत्या की कहानी पहले से बनी जा चुकी थी..मुन्ना बजरंगी का मरना तय था..मुन्ना बजरंगी को पेशी के लिए सुबह बागपत की कोर्ट में पेश करना था..और कहते हैं सुनील राठी को दिल्ली ले जाया जाना था..इस बीच पिस्टल कहां से आई..गोलियां कहां से आईं..कोई नहीं जानता..कैदियों से मिलने जाने वालो के कपड़े तक उतरवाकर चेकिंग करने वाले जेल प्रशासन की इसमें पूरी मिली भगत रही है..बिना जेलर की मदद के कुछ नहीं हो सकता था...

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मुन्ना बजरंगी की पत्नी और भाई ने हत्या का जिम्मेदार ब्रजेश सिंह, केंद्र के दो मंत्री और धननंजय सिंह को ठहराया है..जैनपुर से धनंजय और मुन्ना बजरंगी दोनों चुनाव लड़ना चाहते थे..एक बार मुन्ना बजरंगी ने अपनी पत्नी को जौनपुर से चुनाव लड़वाया भी था...ब्रजेश सिंह से अदावत सीधी थी..ब्रजेश सिंह मुख्तार का दुश्मन है..और मुन्ना बजरंगी मुख्तार के लिए काम करता था..इसलिए ब्रजेश सिंह का भी दुश्मन था..ब्रजेश सिंह बनारस जेल में बंद है..सरकारी दारू के ठेकों से उगाही और खनन के काम में वसूली का धंधा मुन्ना बजरंगी ने धनंजय और ब्रजेश सिंह से छीन लिया था..पहली बार पूर्वांचल में एके47 से लोगों को मर्डर करने का श्रेय बजरंगी को ही जाता है..बजरंगी ने ही पहली बार यूपी में एके 47 का इस्तेमाल किया जब कृष्णानंद राय को मारा था तब 6 लोग मारे गए थे कहते हैं एक एक इंसान से 100 गोलियां तक निकाली गई थीं...कुल 600 राउंड गोलियां चलाईं थीं..बीजेपी विधायक कम माफिया की हत्या के बाद अब बीजेपी राज में मुन्ना बजरंगी की भी हत्या हो गई..

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मुन्ना बजरंगी के माफिया डॉन बनने की कहानी भी फिल्मी है. जौनपुर के रहने वाले मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है. उसे बचपन से गैंगस्टर बनने का शौक था,17 साल की उम्र में पहला अपराध किया.. इसके बाद उसे जौनपुर के स्थानीय दबंग माफिया गजराज सिंह के इशारे पर जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या कर की. 80 और 90 के दशक में उसके बेहिसाब अपराध किये और पूर्वांचल में अपना दबदबा बना लिया फिर वो मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया. 1996 में सपा से विधायक बनने के बाद मुन्ना की मदद से सरकारी ठेकों और वसूली के कारोबार पर मुख्तार अंसारी ने कब्जा जमा लिया...लेकिन इसी दौरान तेजी से उभरते बीजेपी के विधायक कृष्णानंद राय उनके लिए चुनौती बनने लगे. कहा जाता है कि उनके साथ मुख्तार का दुश्मन माफिया डॉन बृजेश सिंह था. 29 नवंबर 2005 को माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के कहने पर मुन्ना बजरंगी ने कृष्णानंद राय और उनके साथ 6 लोगों की हत्या कर दी. 

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इस बार पागपत जेल जे जााने से पहले मुन्ना बजरंगी की पत्नी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कर चुकी थी की मुन्ना बजरंगी की जान को खतरा है...मुन्ना बजरंगी ने खुद भी कहा थी  कि उस पर हमला करवाने की साजिश रची जा रही है लेकिन फिर भी उसे तन्हाई की बैरक में ना रखकर आम बैरक में बंद करना 6 लेयर सिक्योरिटी के बावजूद कोई सीसीटीवी ना होना..गोली चलने के बाद किसी का वहां पर ना पहुंचना...बहुत देर बाद सायरन और ंघंटियां बजाना..ये बताता था कि हत्याकांड अंजाम देने के लिए राठी को लाया गया था..

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