बीजेपी को धूल चटाकर माया के घर पर अखिलेश ने की चाय पर चर्चा


उत्तर प्रदेश को बुआ और बबुआ यानी आखिलेश और मायावती का साथ पसंद आ चुका है..गोरखपुर और फूलपुर के लोकसभा उपचुनाव के परिणामों ने ये सबित कर दिया है..मायावती और अखिलेश ने मिलकर बीजेपी की जातिवादी राजनीतिक चाल को जातिवादी अस्त्र से करारा जवाब दिया है..बीजेपी का दांव खुद बीजेपी के लिए उल्ट पड़ गया है...अखिलेश को समझ आ चुका है कि केवल विकास की बात करके बीजेपी का सामना नहीं किया जा सकता बीजेपी को बीजेपी के ही जातिवादी हथियार से हराया जा सकता है..और इसीलिए गठबंधन के बाद गोरखपुर में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी प्रवीण कुमार निषाद ने 21,961 वोट से भारतीय जनता पार्टी के उपेंद्र दत्त शुक्ल को हरा दिया...और फूलपुर में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार नागेंद्र सिंह पटेल ने 59,213 वोट से बीजेपी को धूल चंटा दी..
                                                    1989 से गोरखपुर पर कब्जा जमाए बैठे योगी
आदित्यनाथ गोरखपुर में हारने के बाद अपनी हार स्वीकार कर चुके हैं...गोरखपुर हारना बीजेपी के लिए बुरे सदमे की तरह है योगी ने हार स्वीकार करते हुए कहा कि अखिलेश ने राजनीतिक सौदेबाजी करके गोरखपुर की सीट जीत ली हम ओवर कॉन्फीडेंस में थे माया और अखिलेश की ताकत को सही से आंक नहीं पाए...सपा की लोकसभा में कुल 5 सीटें हैं जो अब बढ़कर 7 हो गई हैं..और बीजेपी की 71 सीटों में से दो कम हो चुकी हैं...मायावती और अखिलेश का साथ अगर 2019 में भी बरकरार रहा तो बीजेपी के लिए 2019 की राह कांटों भरी होने वाली है..

                       
            मायावती के दलित वोट अभी भी मायावती के साथ हैं...2017 विधानसभा चुनाव में भी मायावती के साथ 22 प्रतिशत वोटबैंक था अखिलेश के साथ भी 22 प्रतिशत वोट बैंक है..पिछली बार 29 प्रतिशत वोट बैंक के साथ अखिलेश ने सरकार बना ली थी..खैर अखिलेश के साथ पिछड़े और मुस्लिम वोट पहले से ज्यादा एकजुट हुए हैं...बीजेपी वो पार्टी बन गई जिसका लड्डू जो लोग खा चुके हैं वो पछता रहे हैं और जिन राज्यों ने अभी तक नहीं खाया वो ललचा रहे हैं..और हां इस उपचुनाव से बीजेपी को समझ जाना चाहिेए की सांप छछूंदर...केर-बेर..हिंदू मुसलमान...नामाज-ईद-होली..कब्रिस्तान-श्मशान के नाम पर भड़काकर अब काम चलने वाला नहीं है.. जनता नौकरियां मांग रही है..क्योंकि बीजेपी ने 2017 में हर साल 2 करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था...लैपटॉप देने का वादा किया था एक भी वादा और एक भी बात पूरा नहीं हुई है...


गोरखपुर और फूलपुर में बीजेपी की हार की वजह

             योगी ने बीजेपी की हार का कारण अतिआत्म विश्वास बताया है...इशारा
पार्टी की तरफ नहीं बल्कि
अमित शाह और मोदी की तरफ था..ये भी नहीं कहा जा सकता कि माया और अखिलेश के साथ आ जाने की वजह से ही बजेपी हार गई बीजेपी की हार का कारण खुद अमित शाह हैं योगी है और केशव प्रसाद मौर्या हैं..मामला ये है कि योगी चाहते थे कि गोरखपुर में उनके गुरू की छोड़ी गई सीट पर वो चुनाव लड़ते थे तो उनकी छोड़ गई सीट पर पीठ के ही आदमी को टिकट दिया जाए लेकिन अमितशाह ने ऐसा नहीं होने दिया..इसीलिए अंदर खाने फूट चलती रही...फूलपुर में भी केशव प्रसाद मौर्या अपनी छोड़ी सीट पर अपनी पत्ती को लड़ाना चाहते थे लेकिन अमित शाह ने वहां भी पार्टी ने कौशलेंद्र सिंह पटेल जो कि बाहरी आदमी थे उनको टिकट दिया जिसकी वजह से सभाएं तो खूब की गईं लेकिन भीतर खाने भूचाल चलता रहा..दोनो सीटों पर ना तो मोदी ने रैली की ना ही अमित शाह ने..सब कुछ केशव और योगी पर छोड़ दिया..माया और अखिलेश के हाथों हार बैठे...ये हार की एक वजह हो सकती है...

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माया से मिलने घर पहुंचे अखिलेश बन गया इतिहास

यूपी में नया राजनीतिक इतिहास बन रहा है..बरसों की दुश्मनी भुलाकर अखिलेश और मायावती ने एक साथ अकर गदर मचा दिया है..बीजेपी खेमे में हड़कंप है और इसी इतिहास को और ऐतिहासित बनाने के के लिए पहली बार अखिलेश यादव लखनऊ में माल एवेन्यू में बने मायावती के घर उनसे मिलने पहुंच गए....40 मिनट तक मायावती और अखिलेश के बीच बातचीत हुई...अगर सब ठीक रहा तो 2019 में माया और अखिलेश की ये जोड़ी बीजेपी को टक्कर देगी..क्योंकि माया और अखिलेश की काट बीजेपी के पास नहीं है..

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