नरेश अग्रवाल की तगड़ी 'बनियागीरी' 2019 के लिए बीजेपी में किया इनवेसमेंट, सपा-बीएसपी दोनों बेचैन


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नरेश अग्रवाल के बीजेपी में जाने पर तमाम लोग रजानीति में सुचिता, अवसरवादिता और दोगलेपन की तमाम दुहाइयां दे रहे हैं...लेकिन राजनीति की किसी भी परिभाषा में ये नहीं लिखा है कि अग्रवाल जी बनिया होते हुए भी बनियों की पार्टी में नहीं जा सकते...वो अलग बात है कि नरेश अग्रवाल को बोलने की तमीज नहीं है...वो मोदी तक को तेली कह चुके हैं...और भगवान राम को विस्की और ठर्रा जैसे ब्रांड ऑफर कर चुके हैं..लेकिन ये भारतीय लोकतंत्र ही है जहां ना जाने किस नशे में नरेश जैसे ठर्रे को बीजेपी ने मोदी के बगल में जगह दे दी..जो कल तक मोदी को गालियां दे रहा था..खैर नरेश अग्रवाल जी हमारे आदरणीय हैं...कई बार हमारी मुलाकात हुई है..और निजी जीवन में शराब के शौकीन भी हैं..  कोई बुराई नहीं है..इस धरा पर अगर बनिया आदमी आपना नफा नुकसान नहीं देखेगा तो और कौन देख पाएगा..माना कि नरेश अग्रवाल तराजू लेकर दुकान पर बैठने वाले बनिया नहीं हैं...लेकिन राजनीति के जिस मोढ़े पर नरेश अग्रवाल बैठे से वहां राजनीति सेवा कभी रही नहीं है...वो तो बातों में वजन डालने के लिए लोगों ने ऐसे ही कह दिया था कि राजनीति समाज सेवा का नाम है..सीधा साफ सा मामला ये था कि सपा में अग्रवाल जी का इनक्रीमेंट हो नहीं रहा था...बीजेपी में ओपनिंग चल रही थी...और नरेश जी निकल लिए..जहां तक मेरी सपा के नेताओं से बात हुई उस हिसाब से समाजवादी पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव नरेश को भाव दे नहीं रहे थे...शिवपाल यादव से बनती नहीं थी..मुलायम की कोई सुनता नहीं है...थोड़ी बहुत चाचा राम गोपाल यादव से बनती थी..लेकिन राम गोपाल भी जया बच्चन के आगे अग्रवाल जी को टिकट दिला नहीं पाए..इसलिए नरेश ने कहा अब रम वाले  राम को ही जपना है..लेकिन नरेश जी से मेरी व्यक्तिगत शिकायत है कि उन्होंने विष्णु जी  के विस्की का पैग बनाया..राम जी के लिए रम बनाया लेकिन बेचारे हनुमान जी को किसी बात की सजा दी कि ठर्रे पर ही गुजर बसर करने को छोड़ दिया..भाई जब दो लोगों को ब्रांडेड दारू ऑफर की थी कि हनुमान जी का अपमान ठर्रा पिलाकर क्यों किया..अब हनुमान जी किस बिरादरी के थे ये मालूम नहीं है वर्ना उस समुदाय के पास नरेश जी के विरोध में और हनुमान जी की खोई प्रतिष्ठा दिलाने के लिए संघर्ष करता..खैर राम जी के समर्थक आगे आए थे..और पार्लियामेंट एक दिन नहीं चलने दी थी..और अब उसी नरेश को राम नरेश बना दिया है..बीजेपी मस्त पार्टी है...आज के जमाने में ऐसा ही होना चाहिए बेशर्म...मैं बीजेपी के साथ हूं..आई लाइक इट....

नरेश अग्रवाल को बीजेपी से क्या मिलेगा ?
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अगर अग्रवाल जी ने ज्वाइनिंग से पहले कुछ इनवेस्ट किया है तो पार्टी में कोई पद मिल सकता है
अगर इनवेस्ट नहीं भी किया है तो भी बीजेपी में जाने का फैसला बिल्कुल सही है
बिना इनवेस्ट के बीजेपी में जाान भी फायदेमंद है क्योंकि 2019 लोकसभा चुनाव आ रहा है
बीजेपी की हवा चल रही है हरदोई से नरेश अग्रवाल के खानदान के टक्कर का कोई है नहीं
अगर नरेश अग्रवाल 2019 हरदोई से लड़ जाएंगे तो कोई हराने वाला है नहीं
साथ ही बेटे का भी भविष्य तर जाएगा..बहू भी विधानसभा के दर्शन कर लेगी
अग्रावाल जी का बीजेपी में जाना सौ टका वन टाइम इनवेस्टमेंट साबित होगा
 
                           ये तो अंधा भी बता सकता है कि नरेश अग्रवाल बीजेपी में खो जाएंगे लेकिन राजनीति हैसियत क्षेत्रीय स्तर पर  जिंदा रहेगी..जिस हरदोई में चपरासी तक नरेश अग्रवाल की नहीं सुन रहा था..उस हरदोई में अब अधिकारी अग्रवाल खानदान के पैर धोकर पी रहे हैं...प्रदेश में बीजेपी की सरकार है...देश में बीजेपी की सरकार है..आधा रौला तो ऐसे ही टाइट हो गया है....बाकी 2019 में अग्रवाल जी का भविष्य उज्वल है..

नरेश अग्रवाल के विघटन से सपा को क्या नुकसान
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नरेश अग्रवाल खुद जाते तो सपा का बोझ ही खत्म होता
लेकिन नरेश अपने साथ अपने बेटे को भी ले गए
नरेश अग्रवाल का बेटा समाजवादी पार्टी का विधायक है
और राज्यसभा चुनाव होने वाले हैं तो एक-एक विधायक की हैसियात देवता जैसी है
सपा ने मायावती से गठबंधन करते समय कहा था कि हम आपको राज्यसभा भेज देंगे
लेकिन नितिन अग्रवाल के बीजेपी में जाने से वोटों का गणित बिगड़ गया है
47 सपा के विधायक हैं...7 कांग्रेस के विधायक हैं एक राष्ट्रीय लोकदल का है
राज्यसभा की एक सीट जिताने के लिए 37 विधायकों की जरूरत है मतलब सपा अपना एक सदस्य आराम से भेज देगी
सपा की तरफ से जया प्रदा चली जाएंगी तो बचेंगे 10 वोट..जिसमें से अग्रवाल जी का बेटा बीजेपी को वोट करेगा यानी बचे 9 वोट
अब सपा के 9 कांग्रेस के 7 और आरएलडी का एक यानी कुल हुए 37 वोट यानी मायावती के भीमराव जीत जाएंगे
लेकिन लकड़ी ये है कि चुनाव 10 सीटों पर है और बीजेपी ने 9 उम्मीदवार खड़े कर दिए हैं..
बीजेपी के पास 9वें उम्मीदवार को जिताने के लिए 28 वोट हैं...मामला साफ है कि क्रॉस वोटिंग होगी
या तो कांग्रेस के विधायक क्रॉस वोटिंग करेंगे या सपा के अगर ऐसा हुआ तो मायावती का मामला गड़बड़ा जाएगा
तो कहने का मतलब ये था कि अग्रवाल जी ने एक तीर दो निशाने साधे हैं
एक तो माया का खेल गड़बड़ा दिया दूसरा 2019 के लिए अपना चबूतरा पक्का करा लिया है


किसके पास कितने वोट
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कुल विधायक: 402
बीजेपी गठबंधन: 324
एसपी: 47
बीएसपी: 19
कांग्रेस: 07
आरएलडी: 01
निर्दलीय: 03
निषाद पार्टी: 01
                                         मुलायम सिंह यादव ने कह दिया है कि नरेश अग्रवाल के बीजेपी में जाने से कोई नुकसान नहीं है बल्कि फायदा हुआ है...लेकिन ये बयान भी वैसा ही है कि जब रपट पड़े तो हर-हर गंगे वरना अब तक हरिद्वार जाकर भी कहते थे..बड़ा ठंडा पानी है खैर...नरेश अग्रवाल बहुत मुंहफट गैर जिम्मेदार और ओछे इंसान हैं..जिनको नहीं पता कि कलाकार और नाचने वाली बोलने में भाषिक संतुलन कैसे स्थापित किया जाता है..विस्की में विष्णु बसें और ठर्रे में हनुमान कहने से भगवान का अपमान होता है..या दरू सम्मान पा जाती है...जिसको नहीं पता कि प्रधानमंत्री को तेली कहना सही है या गलत...ऐसा अबोध और निरअपराध बालक राम नरेश अग्रवाल अमित  शाह को मुबारक हो...

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