शिवपाल के शागिर्द अतीक अहमद फूलपुर से सपा के खिलाफ खड़े हुए

यूपी की फूलपुर लोकसभा सीट के लिए 11 मार्च को होने वाले उपचुनाव में अतीक अहमद ने अखिलेश का गणित गड़बड़ा दिया है..आतीक अहमद के मैदान में उतरने के बाद अब सपा की जीत की संभावनाएं..हार का आशंका में बदल चुकी हैं...फूलपुर देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सीट रह चुकी है..देवरिया जेल में बंद बाहुबली नेता अतीक अहमद के नामांकन के बाद अब तक के सारे कयास और सियासी समीकरण अखिलेश के खिलाफ खड़े हो गए हैं..

फूलपुर 2018 उपचुनाव में सपा, कांग्रेस और बीजेपी समेत कुल 24 प्रत्याशी चुनाव मैदान में ताल ठोंक रहे हैं...अतीक अहमद फूलपुर लोकसभा सीट से ही 2004 में सपा के टिकट पर जीते थे..लेकिन शिवपाल के प्यारे अतीक इस बार अतीक अखिलेश के खिलाफ बगावत करते हुए सपा प्रत्याशी नागेंद्र पटेल को हराने का पूरा चक्रव्यूह तैयार कर दिया है..ये वही अतीक हैं जिनको 2017 में अखिलेश ने टिकट नहीं दिया था लेकिन शिवपाल ने पार्टी में शामिल कर लिया था..और इनकी के परिवार को पार्टी से अलग करने के लिए सपा में गदर शुरू हो गया था..

फूलपुर लोकसभा सीट पर करीब सवा दो लाख मुस्लिम मतदाता हैं...अतीक के नामांकन दाखिल करने से सबसे ज्यादा असहज समाजवादी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता हैं, क्योंकि उनकी चुनावी गणित मुस्लिम-यादव और पटेल मतदाताओं पर आधारित थी. मुस्लिम और यादव मतदाताओं की स्वाभाविक पसंद होने के अलावा क्षेत्र में बड़ी संख्या में पटेल मतदाताओं के होने की वजह से पार्टी ने नागेन्द्र प्रताप सिंह पटेल पर दांव लगाया है. लेकिन अगर कुछ मुस्लिम मतदाता अतीक के खेमे में चले गए तो पटेल, अन्य पिछड़े और कुर्मी मतदाता बीजेपी के कौशलेन्द्र सिंह पटेल को वोट और सपोर्ट दे सकते हैं.

अतीक अहमद का जन्म 10 अगस्त 1962 को यूपी के के श्रावस्ती में हुआ था..पढ़ाई लिखाई में उनकी कोई खास रूचि नहीं थी...इसलिये हाई स्कूल में फेल हो जाने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी...कई माफियाओं की तरह ही अतीक अहमद ने भी जुर्म की दुनिया से सियासत की दुनिया का रुख किया था...अपराध की दुनिया में नाम कमा चुके अतीक अहमद को समझ आ चुका था कि सत्ता की ताकत कितनी अहम होती है. इसके बाद अतीक ने राजनीति का रुख कर लिया. वर्ष 1989 में पहली बार इलाहाबाद (पश्चिमी) विधानसभा सीट से विधायक बने अतीक अहमद ने 1991 और 1993 का चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा और विधायक भी बने...1996 में इसी सीट पर अतीक को समाजवादी पार्टी ने टिकट दिया और वो फिर से विधायक चुने गए...

दल बदलते रहे अतीक


अतीक अहमद ने 1999 में अपना दल का दामन थाम लिया. वह प्रतापगढ़ से चुनाव लड़े पर हार गए. और 2002 में इसी पार्टी से वह फिर विधायक बन गए. 2003 में जब यूपी में सपा सरकार बनी तो अतीक ने फिर से मुलायम सिंह का हाथ पकड़ लिया. 2004 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने अतीक को फूलपुर संसदीय क्षेत्र से टिकट दिया और वह सांसद बन गए..2004 के आम चुनाव में फूलपुर से सपा के टिकट पर अतीक अहमद सांसद बन गए थे...इसके बाद इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट खाली हो गई थी. इस सीट पर उपचुनाव हुआ. सपा ने अतीक के छोटे भाई अशरफ को टिकट दिया था.. मगर बसपा ने उसके सामने राजू पाल को खड़ा किया. और राजू ने अशरफ को हरा दिया. उपचुनाव में जीत दर्ज कर पहली बार विधायक बने राजू पाल की कुछ महीने बाद 25 जनवरी, 2005 को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस हत्याकांड में सीधे तौर पर सांसद अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ को आरोपी बनाया गया था.

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