डीजी सूर्य कुमार शुक्ला चापलूसी का ओवरडोज ले बैठे- व्यंग्य

चापलूसी के लिए वर्दी की कसम भूल गया योगी का अधिकारी

यूपी में एक अधिकारी योगी जी की चापलूसी का ओवर डोज ले बैठे...लखनऊ यूनिवर्सिट में एक प्रोग्राम में गए थे...जोश चढ़ गया..और मंदिर बनाने की कसम खाकर वापस आ गए..ये कसम'खाऊ' साहब ना तो मिस्त्री हैं ना लेबर हैं..ना इंजीनियर हैं ना कॉन्ट्रेक्टर हैं...ना किसी मंदिर के पुजारी हैं..ना पंडा है ना सीढ़ियों पर बैठने वाले भिखारी हैं..ये सूर्य कुमार शुक्ला हैं 1982 बैच के आईपीएस हैं..उत्तर प्रदेश के डीजी हैं..पूरे यूपी के होमगार्डों को कंट्रोल करते हैं..सीधे कहिए तो पुलिस में हैं...जो काम इनके पुर्खे राजनीति में रहते हुए नहीं कर पाए वो काम ये वर्दी पहनकर करेंगे...जो मंदिर अटल नहीं बनवा पाए..आडवाणी नहीं बनवा पाये..मुरली मनोहर जोशी नहीं बनवा पाए वो मंदिर उत्तर प्रदेश के डीजी साहब बनाएंगे इनके पास ऐसी कन्नी है जिससे पलक झपकते ही..मंदिर का लिंटर डाल देंगे..बिम बांध देंगे..मामला कोर्ट में है इस साहब को कानून व्यवस्था पर ध्यान देने के बजाए मंदिर बनाने की कसमें खाते घूम रहे हैं..

अगर  बात कसम की ही है तो इनकी कसम को कैसे सही मान लिया जाए..एक कमस तो इन्होंने वर्दी पहनते समय भी खाई होगी..उस कसम की धज्जियां उड़ा दीं..अच्छा समाज नहीं बना पाए..मंदिर बनाएंगे...कसम खा रहे हैं..वैसे कसम खाने में इनका कोई दोष नहीं है...पुलिस में आने के बाद खाने की आदत हो ही जाती है...हम पूरी जिम्म्दारी से इन डीजी साहब से पूछना चाहते हैं कि आप जिन होमगार्डों के डीजी हैं कि उन होमगार्डों को पिछले 6 महीन से तन्ख्वाह क्यों नहीं मिली..उनको समय पर ड्यूटी क्यों नहीं दी जाती....अगर ऐसी कसमें खाकर सरकारों को ही खुश करना है.. तो जगह नौजवान के लिए खाली कर दीजिए..फिर पंडा बनिए...पोंगा पंडित बनिए..या कन्नी बसुली उठाकर मिस्त्री बन जाइये..कोई पूछने नहीं आएगा...

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