नोएडा, सत्ताई अन्धविश्वास के अधूरे सफ़र का गवाह



नोएडा में मेट्रो का उद्घाटन (google image)
||| प्रधानमंत्री का बयान-  जिस नोएडा के बारे में छवि बन गई थी कि कोई यहां आ नहीं सकता है उस मिथक को योगी जी ने बिना बोले अपने आचरण से ये सिद्ध कर दिया कि सब मान्यताएं गलत होती हैं आधुनिक युग में ऐसा हो नहीं सकता इसलिए मैं उनको दिल से बधाई देता हूं..मुख्यमंत्री कही जाने से कुर्सी चली जाए इस डर से जीते हैं तो ऐसे लोगों को मुख्यमंत्री बनने का हक ही नहीं है..|||

मोदी जी इस हिसाब से तो कभी सन 2000 में आपकी पार्टी के यूपी के मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह को मुख्यमंत्री बनना ही नहीं चाहिए था..जिन राजनाथ सिंह को आपने अपनी सरकार में गृह मंत्री जैसी जिम्मेदारी दे रखी है..वो राजनाथ सिंह नोएडा से इतना डरते थे कि यूपी के मुख्यमंत्री रहते हुए नोएडा के डीएनडी फ्लाई ओवर का उद्घाटन दिल्ली से किया था..मोदी जी आगर आपकी ही मानें तो राजनाथ सिंह जैसे अंधविश्वासी आदमी को देश का गृह मंत्री नहीं होना चाहिए...अगर आपकी ही बात मान ली जाए तो कल्याण सिंह जी को मुख्यमंत्री नहीं होना चाहिए था..नोएडा का भूत उनको भी डराता था....

||| प्रधानमंत्री का भाषण - मान्यताओं में कैद कोई भी समाज प्रगति नहीं कर सकता..हम टेक्नॉलजी के युग में जी रहे हैं विज्ञान के युग में जी रहे हैं श्रद्धा की अपनी जगह है लेकिन अन्ध श्रद्धा की जगह नहीं है...कई सरकारें कई..तरह के टोने टोटके में भरोसा करती हैं..कुछ लोग कार में नींबू मिर्च लटकाकर चलते हैं...|||

मंच पर खड़े आदमी के भाषण में संवाद सिर्फ एक तरफा होता है...सवाल की गुंजाइश होती तो पूछा जा सकता था कि...लखनऊ में इन्ही महान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 5 कालिदास मार्ग पर ठीक पीछे एक बंगला है कोठी नंबर 6 ये कोठी 7 साल से खाली पड़ी थी..योगी के मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा कि कुछ नहीं होता मैं रहूंगा..सब समाजवादियों और बसपाइयों का ढकोसला है..पूजा पाठ कराया..कथा कराई गृह प्रवेश किया और 100 दिन भी नहीं बीते बंगला छोड़कर भागना पड़ा..पता चला किसी ने स्वच्छ उज्जवल और धवल छवि वाले मंत्री जी के खिलाफ याचिका दायर कर दी है..भागते हुए ये कहकर गए कि ये बंग्ला अपशगुनी है...याचिका में कहा गया कि योगी के घर के पीछे बंगला नंबर 6 में रहने वाले मंत्री बघेल साहब गड़रिया जाति के हैं मतलब पिछड़े हैं और एसी जाति धांगर का प्रमाण पत्र बनवाकर टुंडला से विधायकी लड़े और जीत गए...मंत्री हो गए..लेकिन मंत्री जी बेईमानी से विधायकी जीते हैं..मंत्री जी बंगले में रहकर संदेश देने निकले थे...फिलहाल अपनी विधायकी बचाते हुए कोर्ट का चक्कर लगा रहे हैं..




||||प्रधानमंत्री का भाषण - योगी जी के कपड़े देखकर ये भ्रम फैलाया जाता है कि वो आधुनिक सोच के हो ही नहीं सकते..पुराण पोथी होंगे मान्यताओं में बंधे हुए होंगे आज मुझे ये खुशी होती है कि जिस नोएडा के बारे में छवि बन गई थी कि कोई यहां आ नहीं सकता है उस मिथक को योगी जी ने बिना 
बोले अपने आचरण से ये सिद्ध कर दिया कि सब मान्यताएं गलत होती हैं आधुनिक युग में ऐसा हो नहीं सकता |||

भाषण देकर वाहवाही बटोरने की बात है तो बात अलग है लेकिन जमीन पर देखें तो पता चलता है कि अगर आप भगवान पर विश्वास करते हैं तो शैतान में विश्वास करना होगा...हम किसी अन्धविश्वास का समर्थन नहीं करते लेकिन इसी बंगला नंबर 6 का इतिहास ही डरावना है...और युग कोई भी हो बातें ट्रैक रिकॉर्ड पर ही तय होती है इसी बंगला नंबर 6 में..कभी अमर सिंह रहते थे..उनका हषर्र क्या हुआ..आप जानते हैं..एनआरएचएम घोटाले में फंसे माया के करीबी बाबू सिंह कुशवाहा का हाल क्या हुआ..जावेद आब्दी का क्या हुआ..बंगला नंबर 6 में रहने के बाद राजेंद्र चौधरी प्रवक्ता तक नहीं रह गए..कई अधिकारी आए और बंगला छोड़कर भाग खड़े हुए...

||| प्रधानमंत्री जी का भाषण - योगी जी के कपड़े देखकर ये भ्रम फैलाया जाता है कि वो आधुनिक सोच के हो ही नहीं सकते..पुराण पोथी होंगे मान्यताओं में बंधे हुए होंगे आज मुझे ये खुशी होती है कि जिस नोएडा के बारे में छवि बन गई थी कि कोई यहां आ नहीं सकता है उस मिथक को योगी जी ने बिना बोले अपने आचरण से ये सिद्ध कर दिया कि सब मान्यताएं गलत होती हैं आधुनिक युग में ऐसा हो नहीं सकता..योगी को कोई हरा नहीं सकता... ||| 

अगर बरमूडा ट्रैंगल का ट्रैक रिकॉर्ड है कि वहां आज तक कोई जहाज गया और वापस नहीं आया..तो योगी जी को वहां जहाज लेकर एक बार जाना चाहिए...दुनिया से अन्धविश्वास दूर होना चाहिए...नोएडा आने का हिसाब किताब तो 4 साल बाद होगा..लेकिन बरमूडा का परिणाण ईवीएम की तरह बटन दबाते ही मिल जाएगा....खैर मोदी जी की ये बात पूरी तरह से गलत है कि योगी जी नोएडा आकर कलेजा दिखाने वाले पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं...बिल्कुल नहीं ये पूरी तरह से झूठ है..योगी से पहले मायावती 2007 से 2012 के कार्यकाल में 4 बार नोएडा आ चुकी हैं...यहां तक कि इस मिथक को तोड़ने के लिए 2008 में एक रैली भी की थी..लेकिन 2012 में सत्ता में वापस नहीं आ पाईं...कुर्सी तो गंवाई ही साथ ही बहन जी चार बार नोएडा आने की चौगुनी मार झेल रही हैं..योगी वो पहली महान आत्मा नहीं है जो मिथक तोड़ने के लिए गंगाधर से शक्तिमान बने हैं...और पीछे जाइये साल 1994 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव नोएडा के सेक्टर 40 स्थित खेतान पब्लिक स्कूल का उद्घाटन करने आए मुलायम ने मंच से कहा था कि मैं इस मिथक को तोड़ कर जाऊंगा..कि जो मुख्यमंत्री नोएडा आता है उसकी कुर्सी चली जाती है...उसके कुछ महीने बाद ही मुलायम को मुख्यमंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी..1982 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह नोएडा में वीवी गिरी श्रम संस्थान का उद्घाटन करने आए थे...लेकिन कुर्सी नहीं बचा पाए..1988 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह फिल्म सिटी में एक कार्यक्रम में आकर कालिंदी कुंज पार्क का उद्घाटन किया वो भी निकल लिए..फिर 1989 नारायण दत्त तिवारी यूपी के मुख्यमंत्री बने...वो भी नोएडा के सेक्टर 12 में पार्क का उद्घाटन करने आए पार्क का उद्घाटन तो हो गया लेकिन कुर्सी चली गई

      योगी नोएडा आए हैं ये वक्त बताएगा कि योगी की कुर्सी रहेगी या जाएगी...लेकिन राजनीति भविष्य की पोटली में संभावनाओं और कल्पनाओं को टटोलते रहने का नाम है..एक वक्त पर राजनीति की राह में भविष्यवाणियां चाणक्य की भी नहीं चल पाई थीं...आप तो फिर भी आणवाणी 
जैसे वृक्ष के अभयदान से पल्लवित हुई वो परजीवी अमर बेल हैं जिसने उस वट वृक्ष को ही सुखा दिया..

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