मंत्री जी इधर छापा मारते हैं, उधर छप जाते हैं, ये भी एक कला है | व्यंग्य

छापा मारना क्षत्रियों के रणकौशल का एक हिस्सा था..और उस रण कौशल को कुशलता से जीवित रखने में मुख्यमंत्री योगी के मंत्रियों का अहम योगदान है..अगर यूपी में योगी सरकार नहीं होती तो छापेमार पद्धति को जीवित रखने के लिए..देश के सूचना विभाग को जनहित में विज्ञापन खर्च करने पड़ते..लेकिन यूपी के मंत्रियों ने छापेमारी की कला को वहीं से आगे बढ़ाया है..जहां से शिवाजी, टीपू सुल्तान और बाजीराव ने छोड़ा था..

  योगी सरकार में छापेमार पद्धति के सरगना एकलौते मुस्लिम मंत्री मोहसिन रजा हैं..हज हाउस के बंद कमरे में AC चलता है..बत्ती खुली रहती है..ये बात दुनिया के सामने लाने वाले मोहसिन साहब ही हैं.. इनके छापे से खुलासा हुआ था कि हज हाउस के भीतर मुलायम और आजम खान दीवार पर लटके हुए हैं..मोहसिन रजा मुस्लिम अल्पसंख्यक और हज मंत्रालय के मंत्री हैं लेकिन छापेमारी के अलावा बता नहीं पाएंगे कि इन्होंन किया क्या है...विज्ञान एवं सूचना प्रद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रद्योगिकी के लिए भी क्या सोचा है..सर जी उसके भी मंत्री हैं...इनका प्लान क्या है..ये यूपी को किस तरफ ले जाना चाहते हैं..इनका विजन क्या है..सीधी और सच्ची बात ये है कि सर जी अब तक प्रवक्ता थे..मीडिया वालों से ठीक बनती है..और बिना कुछ किए कैमरे के आगे अभिनय कैसे करना है..उसके बेहतरीन खिलाड़ी हैं.

माया सरकार में रामअचल राजभर..अखिलेश सरकार के आखिरी दिनों में गायत्री प्रसाद प्रजापति और अब परिवहन का जिम्मा श्री स्वतंत्र देव सिंह जी वहन कर रहे हैं..ये भी छापेमार कला से काफी प्रभावित हैं..आदमी जमीनी हैं..लेकिन मंत्री बनने के बाद सरकारी बसों में चढ़कर कैमरों के सामने पूछ रहे हैं कि मेरे प्यारे यात्रियों बस में कोई तलकलीफ तो नहीं.. पूछ इसलिए रहे हैं कि तकलीफ अभी बताओगे तो अखिलेश के खाते में जाएगी और बाद में वैसे भी कौन पूछने आता है..वो यात्री बेचारे क्या बोलेंगे जिन्होंने बस में आज तक सुविधा नाम चिड़िया नहीं देखी..खैर क्या परिवहन मंत्री जी को इतने सालों के राजनीतिक अनुभव में कभी समझ नहीं आया कि बस में यात्रियों को कैसी दिक्कत आती है..खचाड़ा बसों से आदमी किस तरह परेशान होता है..बसें कितने ढाबों पर जबरन खड़ी हो जाती है..कितनी डग्गामार बसें दिल्ली से लखनऊ के बीच ज्यादा किराया वसूलकर AC बस के नाम पर लोगों को चूना लगा रही हैं..लखनऊ बताकर कानपुर उतार दे रही हैं..क्या आदरणीय स्वतंत्र देव सिंह जी ने कोई नंबर जारी किया..कि अगर रास्ते में कोई तकलीफ दुख परेशानी संकट या बस वाले कोई बदतमीजी करें तो यात्री बस का नंबर और परेशानी बताए तुरंत बस को ट्रैक करके सबक सिखाया जाएगा...नहीं ऐसा कुछ नहीं किया है..किराया बढ़ाया है कितना बढ़ाया है वो अखबार पढ़कर पता कर लीजिएगा क्योंकि मेरा परिवहन विभाग से कोई लेना देना नहीं है..मैं अभी सिर्फ मंत्री जी की बात कर रहा हूं..

छापेमार मंत्रियों की कमी नहीं है इस समय सब छापा मार रहे हैं..अनुपमा जायसवाल आंगबाड़ी केंद्रों पर छापेमारी कर रही हैं..पंजीरी कैसी मिलती है वहां मैं बताऊंगा तो मुद्दे से भटक जाउंगा..वीडियो लिंक दूंगा देख लीजिएगा.. ग्रामीण विकास के लिए महेंद्र सिंह अलग छापे मार रहे हैं.

फंडा सीधा है मंत्री जी इधर छापा मारते हैं उधर छप जाते हैं.. और सबसे शानदार बात ये है कि मोहसिन साहब मंझे हुए कलाकर हैं... मोहसिन जी माफ कीजिएगा मैं आपसे बहुत प्रभावति हूं..नेशनल वॉयस को वैसी ही एक्टिंग करके सब कुछ एक्सक्लूसिव बताते हैं..जैसे न्यूज नेशन को एक्सक्लूसिव बताया था.. वैसी ही एक्टिंग के साथ बिना किसी जंप कट के ईटीवी के सामने भी प्रकट होते हैं..सेम भावनाओं के साथ ANI के सामने भी हाजिर होते हैं..अगर राजनीति में भी कोई दादा साहब फाल्के पुरस्कार होता तो..पहले नॉमिनी कसम से मोहसिन साहब आप ही होते..अभी तक राजनीति में झूठ बोलने वालों की जरूरत थी..वादे करने वालों की जरूरत थी.बाहुबली होना भी एक तरह का प्रमाण पत्र था कि आप राजनीति के लिए तैयार हैं... लेकिन अब एक्टिंग यानी अभिनय अपनी अलग-जगह बना रहा है..और छापेमारी प्रथा भी लुप्त होने से बच रही है..कौन कहता है राजनीति नहीं बदल रही है...देखिए तो सही 


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