गाय और खूंटे से बंधा दलित


दलित इंसान ही हैं..लेकिन  चुनाव के समय वोट का अधिकार इन्हें महान बना देता है..यूपी में आर्थिक और शैक्षिक पैमाने पर दलितों की स्थिति क्या है सब जानते हैं..लेकिन यूपी में चुनाव आ रहे हैं इसलिए राजनीतिक तौर पर दलितों का सामाजिक प्रमोशन हो रहा है..दलित सबसे प्यारे और सबके दुलारे हो चुके हैं...दुलार 2017 की जनवरी तक जारी रहेगा..और तब तक दिलितों से प्यार और उनके पैरोकार बांस की तरह बढ़ेंगे..

मोदी गौ रक्षकों को बता चुके हैं कि मेरे दलित भाइयों को कुछ मत कहो..मारना है तो मुझे गोली मार दो..लेकिन मायावती दलित समुदाय के भीतर हुई किसी भी हलचल पर सबसे पहले बोलने का अपना अधिकार समझती हैं..लकिन इस बार यूपी विधानसभा चुनाव में गाय और मुसलमान नहीं गाय और दलित की जोड़ी बनी है..मतलब चुनाव कोई भी हो..गाय कॉमन फैक्टर है..दलितों की तरह ही गाय भी इंसानों के बीच रहती है..खैर कुछ गाय चुनावी होती हैं कुछ दुधारू होती हैं..दुधारू गांव में किसानों के घर रहती हैं..और चुनावी..सुविधानुसार गौ रक्षकों की जुबान पर निवास करती हैं..


2002 में यूपी में बीेजपी के आखिरी ड्राइवर राजनाथ सिंह थे..तब से आज तक बीजेपी की चुनावी गाड़ी यूपी में पंचर पड़ी है..बीजेपी यूपी में हर हाल में जिंदा होना चाहती है..और रोटेशन के हिसाब से बीएसपी को फिर से राजपाठ चाहिए..और अखिलेश यादव भी इतिहास को बदलते हुए अपने काम के दम पर दोबारा वापसी  चाहते हैं..लेकिन गाय अखिलेश के साथ भी कॉमन है..क्योंकि अखिलेश जातिगत गुण ही उन्हें ग्वाला बनाता है..यानी सबसे बड़ा गौ रक्षक..

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