16 साल 7 मुख्यमंत्री, उत्तराखंड का दुर्भाग्य

उत्तराखंड की हरीश रावत सरकार चली जाएगी ये 100 फीसदी तय हो चुका है.. हरीश रावत अपने ही लोगों को साथ लेकर नहीं चल पाए...9 नवम्बर 2000 में बीजेपी की तरफ से नित्यानंद स्वामी के तौर पर उत्तराखंड को पहला मुख्यमंत्री मिला..लेकिन उनकी जर्नी लंबी नहीं चली..30 अक्टूबर 2001 से बीजेपी के भगत सिंह कोश्यारी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हो गए 123 दिन तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे...

फिर पहली बार 2002 में  विधानसभा चुनाव हुए... रामनगर से चुने हुए विधायक नारायण दत्त तिवारी पहले उत्तरांखंड के चुने हुए मुख्यमंत्री बने..यानी 2 मार्च 2002 से 7 मार्च 2007 तक राज किया..

फिर दूसरे विधानसभा चुनाव हुए यानी 8 मार्च 2007 से धुमाकोट से चुनकर आए भुवन चन्द्र खण्डूरी 23 जून 2009 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे....खंडूरी के 839 दिन मुख्यमंत्री रहने के बाद..रमेश पोखरियाल निशंक..जो कि थलीसैंड से विधायक चुनकर आए थे..24 जून 2009 से 10 सितम्बर 2011 तक बीजेपी की तरफ से सीएम रहे..निशंक के 808 दिन राज करने के बाद..भुवन चंद्र खंडूरी की फिर से वापसी हुई..यानि  11 सितम्बर 2011 से 13 मार्च 2012 तक 185 तक फिर से  खंडूरी ने राज किया..


2012 में तीसरी विधानसभा का चुनाव हुआ..तो  सांसद विजय बहुगुणा को काठ का उल्लू होने की वजह से मुख्यमंत्री बना दिया गया..जब विजय बहुगुणा को सांसद होते हुए भी मुख्यमंत्री बनाया गया तब हरीश रावत और हरक सिंह रावत ने आवाज बुलंद की लेकिन आलाकमान ने दोनों को मुख्यमंत्री की रेस से बाहर करके विजय बहुगुणा को बिठा दिया ...13 मार्च 2012 से 31 जनवरी 2014 तक विजय बहुगुणा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे..उत्तराखंड आपदा के समय लाचारी दिखाने के कारण विजय बहुगुणा को सत्ता से बाहर कर दिया गया..उसी दौर में मुख्यमंत्री ना बन पाने की वजह से कलेश कर रहे हरीश रावत को केंद्र में मंत्री बना दिया गया था लेकिन जैसे ही विजय बहुगुणा को कुर्सी से पैदल किया गया..


हरक और हरीश रावत ने फिर से दावा ठोक दिया..फिर लोकसभा सांसद हरीश रावत कुर्सी लपकने में कामयाब रहे..और हरक सिंह रावत के हाथ फिर खाली रह गए..1 फ़रवरी 2014 को हरीश रावत मुख्यमंत्री बन गए..अब हरीश रावत से असंतुष्ट हरक सिंह रावत ने मोर्चा खोल दिया..जब विजय बहुगुणा की ताजपोशी की जा रही थी तो कांग्रेस के चेहरा माने जाने वाले सतपाल महाराज को भी दरकिनार किया गया था..सतपाल महाराज ने बीजेपी का दामन थाम लिया था लेकिन सतपाल महाराज की पत्नी अमृता रावत कांग्रेस में ही रहीं और अब बागी विधायकों की तीसरी बड़ी मुखिया बनकर उभरी हैं यानी हरक सिंह रावत की अगुआई में 9 कांग्रेस विधयकों ने विद्रोह कर दिया जिसमें विजय बहुगुणा और अमृता रावत की भूमिका मेन कैरेक्टर की तरह है....

Comments