कांग्रेस की थाली गरोबों को गाली

राजनीति की रेत पर ठंडी ठंडी छांव हो और कांग्रेसी दफ्तरों में छककर खाने को छप्पन भोग...तो गरीबों की थाली...गाली बन ही जाती है...कलाकार से कांग्रेसी बने बब्बर साहब हीरोगिरी और नेतागिरी में फर्क नहीं जानते...उनके लिए सब खेल है...इसीलिए पसीना बेचकर पेट भरने को खेल समझते हैं...12 रूपए की थाली बताकर गाली दे रहे हैं...

मुंबई से निकलकर दिल्ली पहुचते-पहुंचते खाने का भाव गिर गया...देश ने कांग्रेस वाले रशीद मसूद को बोलते पाया कि जामा मस्जिद में खाना 5 रूपए में मिलता है...पत्रकारों ने मसूद ढाबे की तलाश में जामा मस्जिद की एक-एक गली कांड़ डाली...लेकिन कांग्रेसियों के आंकड़ों की तरह दुकान का भी पता नहीं मिला...पांच रूपए वाले खाने की तलाश में 500 का पेट्रोल स्वाहा हो गया..


                                                  

कांग्रेसी लंगर की लाइन में फारूख अब्दुला भी खड़े थे...लफ्फाजी का कटोरा थामकर...गरीबों के पेट को 1 रूपए में पाट दिया...भाई वाह ये बढिया है..एक रूपए में पेट भरकर महान भारत आगे बढ़ेगा...एक रूपए में पेट भरना जरूरी है...तभी देश कुछ तूफानी करेगा...अब कांग्रेस समय शिला पर नया नारा गढ़ने वाली हैं....पेट के आगे जीत है...बब्बर की थाली 12 रुपये... राशिद मसूद का खाना 5 रुपए...फारुख अब्दुल्ला का भरपेट भोजन 1 रुपए में...देश थोड़ा और इंतजार कर रहा है...शायद मुफ्त भी मिलने लगे..

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